संसाधन सर्वेक्षण

भारतीय मात्स्यिकी सर्वेक्षण, स्थान एवं समय की आवश्यकताओं एवं प्राथमिकताओं के आधार पर वार्षिक मात्स्यिकी  सर्वेक्षण, निर्धारण एवं अनुसंधान कार्यक्रम तैयार करता हैं। बेस कार्यालय अपने कार्यक्रम, परम्परागत मछुआरों, छोटे एवं मध्यम नाव प्रचालकों एवं गहन समुद्री मत्यन टूना लाँग लाइनिंग के औद्योगिक बेडे़ की आवश्यकताओं के आधार पर तैयार करते हैं। कार्यक्रम का अनुमोदन परामर्शी समिति द्वारा की जाती है और प्रमुख स्टेकहोलडरों (पणधारियों) को उपलब्ध कराता है।

वर्ष 2017-18 के लिए भारतीय मात्स्यिकी सर्वेक्षण(भा.मा.स.) द्वारा किए जाने वाले मात्स्यिकी संसाधन सर्वेक्षण, निर्धारण एवं अनुसंधान कार्यक्रम, भा. मा. स. के आँकडा उत्पादन के अंतिम उपभोक्ताओं अर्थात परम्परागत मछुआरों, यंत्रीकृत मत्स्यन, नाव प्रचालकों, गहरे समुद्री मत्स्यन उद्योग विशेषकर आगामी टूना लॉंग लाइन मत्स्यन उद्योग की आवश्यकताओं पर विचार करते हुए बेस स्तर पर मुख्यतः सूत्रबद्ध किया है। 

बेस कार्यालयों के अपने परामर्शक समूहो  एवं भा. मा. स. मुख्यालय के परामर्शक समिति ने पिछले वर्ष के वार्षिक कार्यक्रम के कार्यान्वयन के मूल्यांकन के बाद तथा समुद्री मात्स्यिकी क्षेत्र के वर्तमान एवं भावी आवश्यकताओं पर विचार करके कार्यक्रम का अनुमोदन किया है। पर्यावरण हितैषी, संसाधन विशिष्ट फिशिंग गियर, जालरन्ध्र चयनात्मकता अध्ययन आदि जैसे उत्तरदायी मात्स्यिकी के लिए आचार संहिता से संबंधित विविध मामलों पर कार्यक्रम में पर्याप्त जोर दिया गया है। अपतट क्षेत्र के संसाधनों के संरक्षण में मार्ग एवं उपायों के सुझाव देने के साथ तटीय समुद्र में शोषित मत्स्यन स्टॉक की मॉनिटरिंग को भी कार्यक्रम में काफी़ महत्व दिया है ।  

      वर्ष के दौरान कार्यान्वित की जानी वाली अंतर-संस्थानीय एवं अंतर-अनुशासी अनुसंधान परियोजनाएं भी कार्यक्रम में प्रस्तुत की है। कार्यक्रम में मछुआरों के हित के लिए आधुनिक मत्स्यन उपकरण एवं मत्स्यन तकनीक के प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन प्रदान करने का प्रावधान भी है।

21 मार्ची 2018 पूर्वाह्न 11:10 इस पृष्ट का अध्यतन किया गया।