सर्वेक्षण एवं अनुसंधान

महाद्वीपीय द्दज्जा के तलमज्जी संसाधनों का सर्वेक्षण

महाद्वीपीय द्दज्जा में तलमज्जी फिश स्टॉक के सर्वेक्षण में भारतीय मात्स्यिकी सर्वेक्षण ने महत्वपूर्ण प्रगति की है । इन क्षेत्रों में अनेक परम्परागत एवं गैर-परम्परागत मछली प्रजातियाँ हैं । महाद्वीपीय द्दज्जा से अनुमानित वार्षिक संभाव्य उपज लगभग 1905 हज़ार टन है । भा. मा. स. क्षेत्र में गहन ट्रॉल सर्वेक्षण जारी रखा जहाँ प्रयास अपर्याप्त पाया गया ।

महाद्वीपीय ढलान के तलमज्जी संसाधन सर्वेक्षण

महाद्वीपीय ढलान में संचालित ट्रॉल सर्वेक्षण से गहरे समुद्री क्रस्टेशियन्स एवं फिन फिश जैसी उच्च मूल्य के अनेक तलमज्जी स्टॉक की उपलब्धि पाई गई । इस क्षेत्र में संसाधनों का वितरण, संयोजन, स्टॉक घनत्व की पूरी जानकारी प्राप्त करने हेतु सर्वेक्षण प्रगति पर है । 200-500 मी. गहराई क्षेत्र से गहन समुद्री श्रिम्प एवं लॉबस्टर्स की वार्षिक संभाव्य उपज लगभग 28,000 टन अनुमानित की है ।

महासागरीय समुद्र में टूना एवं संबंधित संसाधनों का सर्वेक्षण

जबकि हिन्द महासागर में दूरस्थ जल मत्स्यन राष्ट्रों द्वारा महासागरीय टूना मात्स्यिकी में उन्नति कर रही है और कुछ तटीय राष्ट्रें भी टूना स्टॉकों का समुपयोजन बढ़ा रहे है, भारत हिन्द महासागर के टूना मानचित्र में  अभी तक स्थान प्राप्त नहीं किया है । भा. मा. स. द्वारा किए गए अन्वेषणात्मक सर्वेक्षण से अण्डमान एवं निकोबार तथा लक्ष द्वीप समूह के चारों ओर के समुद्र सहित अनन्य आर्थिक क्षेत्र के विभिन्न क्षेत्रों में येल्लो फिन टूना, बिग आई टूना तथा बिल फिश की प्राप्ति दर्शाती है । हमारे पास भारतीय अनन्य आर्थिक क्षेत्र में बड़े पेलाजिक टूना स्टॉकों के मौसमी एवं प्रवसन प्रक्रिया, वितरण, उपलब्धता पर सुरक्षित आँकड़ा बेस उपलब्ध है तथा समीपस्थ महासमुद्र से स्टॉकों पर सीमित सूचना है । वर्ष 2005 के दौरान दो मोनोफिलमेट लॉग लाइनरों  के आगमन के साथ सर्वेक्षण प्रयासों में अधिक तेज़ी आई और भा. मा. स. ने भारतीय अनन्य आर्थिक क्षेत्र में मोनोफिलमेंट लॉग लाइनिंग की नई प्रौद्योगिकी परिचय कराने में तथा भारतीय उद्यमियों द्वारा विदेशी देशों में "साषिमी" ग्रेड टूना के निर्यात बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है ।

नेरिटिक पेलाजिक संसाधनों का सर्वेक्षण

सारडीन एवं मैकरेल जैसे तटीय पेलाजिक संसाधनों को समुद्री सेक्टर में अधिक महत्वपूर्ण मानते है । नेरिटिक पेलाजिक स्टॉकों के वार्षिक उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखते हुए, इन संसाधनों के प्रंबंधन हेतु स्टाँकों का मूल्य निर्धारण करना महत्वपूर्ण मानते हैं । पेलाजिक संसाधनों के लिए संचालित प्रारंभिक सर्वेक्षण के आधार पर पेलाजिक मत्स्य संसाधनों की संभाव्यता 1,742 हज़ार टन आकलित किया है ।

संसाधन मॉनिटरिंग सर्वेक्षण

संपोषित विकास हेतु प्रबंधन उपायों के विकास करने के लिए विविध मत्स्य स्टाँकों, उनके वितरण तथा घनत्व की स्थिति पर सूचना अद्यतन करने हेतु मॉनिटरिंग सर्वेक्षण महत्वपूर्ण है । संस्थान महाद्वीपीय द्दज्जा क्षेत्रों के अन्दर स्टॉकों के लिए मॉनिटरिंग सर्वेक्षण करता है । वार्षिक जैविक मात्रा आकलित करने हेतु मॉनिटरिंग सर्वेक्षणों के परिणामों का प्रयोग किया जाता है ।

पर्यावरण- हितैषी मत्स्यन प्रक्रियाएं / मत्स्यन पद्धतियाँ

Iउप पकड़ कम करने तथा फिशिंग गियर जो समुद्री पारिस्थितिक तंत्र के भौतिक एवं जैविक डीग्रेडशन में योगदान नहीं करेगा ऐसी नई मत्स्यन पद्धतियाँ विकसित करने एवं प्रोन्नत करने हेतु भा. मा. स. ने प्रजाति विशिष्ट मत्स्यन गियरों का प्रयोग करके प्रयोगात्मक मत्स्यन करता है । विविधीकृत मत्स्यन विधियाँ जैसे स्क्विड जिग्गिंग, ट्रैप मत्स्यन, बाँट्टम सेट लॉग लाइनिंग इत्यादि उत्तरदायी मत्स्यन हेतु आचार संहिता के अनुसार मछुआरों में लोकप्रिय एवं अभ्यस्थ है ।

जैव-विविधता अध्ययन

अति मत्स्यन तथा अनुचित एवं विनाशकारी मत्स्यन विधियाँ, समुद्री आवास से संबंधित प्रजाति प्रचुरता में परिवर्तन आया है । सफल मात्स्यिकी प्रबंध, न केवल मछली पारिस्थितिकतंत्र तथा इस से प्रभावित पारिस्थितिक कारको को समझने बल्कि पारिस्थितिक तंत्र में प्राणीजात एवं वनस्पति जात का ज्ञान लेने तथा उसकी प्रदूषण में असुरक्षा एवं पर्यावरण में अन्य परिवर्तन पर भी निर्भर है । समुद्री मत्स्य विविधता एवं भारतीय समुद्र में घनत्व को पहचानने की आवश्यकता पर विचार करते हुए, भा. मा. स. द्वारा भारतीय अनन्य आर्थिक क्षेत्र में फिन फिश, क्रस्टेशियन्स तथा सेफैलोपोड संसाधनों के जैव विविधता पर बेस लाइन आँकड़ा एकत्रित कर रहा है।

जैविक अध्ययन

जैविक अनुसंधान, प्रजातियों की गतिकी समझने में, स्टॉक निर्धारण अध्ययन का एक समग्र हिस्सा है । व्यावसायिक स्तर पर मात्स्यिकी के विकास पर पूर्वानुमान देने के लिए मछली प्रजातियों के आकार, वृद्धि, आयु संरचना, भर्ती प्राक्रिया इत्यादि पर सूचना आवश्यक है । भोजन एवं भोजन करने की आदत पर सूचना तथा शिकार- परभक्षी संबंध पारिस्थितिक वंशानुक्रम तथा पारिस्थितिक तंत्र में सह-अस्तित्व प्रजातियों के पारस्परिक क्रिया पर महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करती है । संरक्षण एवं प्रबंधन उपायों को प्रस्तुत करने हेतु पुनरुत्पादक जीव विज्ञान पर सूचना आवश्यक है । संस्थान नियमित रुप से उपर्युक्त पहलुओं पर जैविक आँकड़े संग्रहित करता है तथा इन अध्ययनों का परिणाम विभिन्न उद्देश्यों के लिए प्रयोग किया जाता है ।