हमारे बारे में

वर्ष 1946 में भारत सरकार ने गहरे समुद्र मत्स्यन के विकास के माध्यम से खाद्य आपूर्ति की बढ़ोत्तरी के उद्देश्य के साथ गहरे समुद्री मत्स्यन स्टेशन के नाम से एक आरंभिक परियोजना शुरु की थी।

परियोजना को वर्ष 1974 में सर्वेक्षण संस्थान की प्रतिष्ठा प्राप्त हुई और अन्वेषणात्मक मात्स्यिकी परियोजना का नाम दिया। अपतट मत्स्यन स्टेशन के नाम से ज्ञात संस्थान के बेस कार्यालय सभी समुद्रवर्ती राज्यों में स्थित थे। अन्वेषणात्मक मत्स्यन, मत्स्यन स्थल का चार्टिंग, मत्यन प्रचालनों का प्रशिक्षण, गहन समुद्री मत्स्यन का व्यावसायिक संभावना का परीक्षण इत्यादि इसके नियत कार्यक्रम थे।

अनन्य आर्थिक क्षेत्र (ई..जेड) की घोषणा एवं समुद्री मात्स्यिकी विकास की अनुवर्ती परिवर्तन के साथ संसाधनों पर सूचना हेतु बढ़ती आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए संस्थान को वर्ष 1983 में मुख्य ढ़ाँचागत एवं कार्यात्मक परिवर्तन हुआ। इसको पुनर्गठित किया गया  और राष्ट्रीय संस्थान के रुप में उन्नत कर भारतीय मात्स्यिकी सर्वेक्षण (भा.मा.स.) के नाम से पुनः नामकरण किया।  

भा. मा. स. को पुनः संगठित किया गया और राष्ट्रीय संस्थान के रुप में अपग्रेड करके  वर्ष 1988 में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान के रुप में मान्यता प्राप्त हुई। पुनः संगठन के परिणाम स्वरुप, संस्थान ने इसके प्रकार्य और कार्यकलापों की संभावना एवं अंतर्वस्तुओं को विस्तार दिया और अपग्रेड किया।

भारतीय मात्स्यिकी सर्वेक्षण,  संपोषित उपयोग बढ़ाने एवं समुद्री मात्स्यिकी संसाधनों के प्रबन्ध हेतु भारतीय अनन्य आर्थिक क्षेत्र (ई ई जेड) तथा समीपस्थ क्षेत्र में मात्स्यिकी संसाधनों का सर्वेक्षण एवं निर्धारण में प्राथमिक उत्तरदायित्व के साथ एक प्रमुख मात्स्यिकी संस्थान के रुप में उभरा है।

समुद्री अभियांत्रिकी प्रभाग (एम ई डी) - भा. मा. स. में नवीनतम जोड़

समुद्री अभियांत्रिकी प्रभाग,  भा मा. स. में नवीनतम जोड़ है जिसका वर्ष 2009 में 3.8 एकड़ मुख्य भूमि एवं एक जेट्टी के साथ पहले आई एफ पी (वर्तमान में निफफट्ट) से स्थानांतरित हुआ। एम ई डी, गहन समुद्र मत्स्यन पोतों के शुष्क गोदीकरण अन्तर्जलीय मरम्मतों के साथ अनुरक्षण कार्य कर सकता है।  एम ई डी में निम्नलिखित सुविधाएं उपलब्ध है।

स्लिप वे यार्ड  -  150 जी अर टी तक पोतों को गोदी में रखने की क्षमता  है। स्लिपवे की विशेषता यह है कि शुष्क गोदीकरण  के समय पोत को समतल अवस्था में रखा जा सकता है।

अभियांत्रिकी कर्मशाला - इसमें आवश्यक मशीनरी एवं उपकरण जैसे लेथ मशीन, रेडियल ड्रिल्लिंग मशीन, प्लेट एवं पाइप बेंडिग मशीन, न्यूमेटिक पाँवर हेम्मर आदि है।

आई एल आर सर्विसिंग सेंटर - आई एस ओ 9001:2000 के साथ प्रमाणित एवं डी जी विप्पिंग द्वारा अनुमोदित|

* ड्रेडजिंग - एम ई डी के पास 40 क्यूबिक मीटर प्रति घंटा क्षमता के साथ ग्रेब ड्रेडजर है तथा कट्टर सक्शन ड्रेडजर भी है।

समुद्री इलेक्ट्रोनिक अनुभाग - एम ई डी के समुद्री इलेक्ट्रोनिक अनुभाग इलेक्ट्रोनिक उपकरणें जैसे इक्को साँऊडरों, आटो  पायलट, रडार, जी पी एस, वी एच एफ एवं ए आई एस आदि की मरम्मत एवं अनुरक्षण करता  है।

 

वर्ष 2009-10 के दौरान समुद्री अभियांत्रिकी प्रभाग के आई एल आर सर्वीस स्टेशन ने 23 बेडों के सर्वीस किया है और  रु 7.0/- लाख राजस्व प्राप्त हुआ है। जेट्टी का सुदृढ़ीकरण पर कार्य एवं ताजा पानी टैंक का निर्माण कार्य प्रगति पर है। एम ई डी ने ओट्टर बोर्ड के 3 सेट बनाकर भा. मा. स. पोतों को आपूर्ति की है। एम ई डी में बनाए गए दो बर्फ क्रषर  एल डी सी एल को आपूर्ति की है।

4 फरवरी 2014 सायम 02:20 को इस पृष्ट का अध्यतन किया गया।